📍 जवाई (पाली) | विशेष रिपोर्ट
जवाई क्षेत्र के नाजुक इको सिस्टम और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद नई सख्त व्यवस्था (SOP) लागू की जा रही है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य जवाई में बढ़ते अनियंत्रित पर्यटन पर रोक लगाना और लेपर्ड जैसे वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।
🐆 जवाई: जहां इंसान और लेपर्ड का अनोखा संतुलन
पाली जिले का जवाई क्षेत्र अपने ग्रेनाइट पहाड़ों, प्राकृतिक गुफाओं और लेपर्ड की मौजूदगी के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां वर्षों से इंसान और वन्यजीवों के बीच संतुलन बना हुआ था, लेकिन हाल के वर्षों में पर्यटन के दबाव ने इस संतुलन को प्रभावित किया है।
🚨 क्या हैं नई SOP के मुख्य नियम?
नई गाइडलाइन के तहत कई अहम बदलाव किए गए हैं:
- सभी सफारी वाहनों में GPS अनिवार्य
- GPS डेटा की निगरानी के लिए बाहरी एजेंसी नियुक्त
- पूरे जवाई क्षेत्र को 4 क्लस्टर में विभाजित
- संवेदनशील क्षेत्रों की अलग पहचान और निगरानी
👉 इससे हर वाहन की गतिविधि पर नजर रखी जाएगी और नियमों का उल्लंघन तुरंत पकड़ा जाएगा।
⚖️ इन गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 के तहत अब निम्न गतिविधियां गंभीर अपराध मानी जाएंगी:
- नाइट सफारी
- बैटिंग (मांस डालना)
- चारा डालना
- ड्रोन उड़ाना
- GPS से छेड़छाड़
👉 नियम तोड़ने पर:
- वाहन जब्त/रोक दिया जाएगा
- ब्लैकलिस्ट किया जाएगा
- ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा
🏛️ कलेक्टर की निगरानी में बनेगी कमेटी
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए जवाई सफारी एंड इको-टूरिज्म कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे। यह कमेटी नियमों के पालन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगी।
⏳ 60 दिन का ट्रांजिशन पीरियड
नई SOP लागू होने से पहले प्रशासन ने 60 दिन का समय दिया है, जिसमें:
- सभी वाहनों का रजिस्ट्रेशन
- GPS इंस्टॉलेशन
- ड्राइवर और रिसॉर्ट संचालकों से शपथ पत्र
👉 इसके बाद नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाएगा।
⚠️ नक्शे और जमीन की हकीकत में बड़ा अंतर
जवाई क्षेत्र में एक बड़ी खामी सामने आई है:
- कई पहाड़ियां सरकारी रिकॉर्ड में राजस्व भूमि दर्ज
- वन विभाग केवल मैप के आधार पर NOC देता रहा
- जमीन पर मौजूद लेपर्ड गुफाएं और ब्रीडिंग साइट्स नजरअंदाज हुईं
👉 बाली क्षेत्र के कोठार गांव में रिसॉर्ट निर्माण के बाद
लेपर्ड के मांद छोड़ने (Den Abandonment) के संकेत मिले हैं।
📉 इको-टूरिज्म से शो-टूरिज्म तक का सफर
हाल के वर्षों में जवाई में पर्यटन का स्वरूप बदल गया:
- सीजन में 300 से ज्यादा सफारी वाहन
- लेपर्ड को पास लाने के लिए मांस डालना
- रात में फ्लैशलाइट के साथ सफारी
- गुफाओं के पास भीड़ और शोर
👉 इससे वन्यजीवों के व्यवहार और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है।
🧭 क्या बदलेगा अब?
नई SOP लागू होने के बाद:
- अनियंत्रित पर्यटन पर लगेगी रोक
- लेपर्ड और अन्य वन्यजीवों को मिलेगा सुरक्षित माहौल
- जवाई का इको सिस्टम फिर से संतुलित होने की उम्मीद